नई दिल्ली : भारतके यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के डिजिटल इण्डिया के तहत भारतीय खाद्द निगम में आर्टिफ़िश्यल इन्टेलीजेन्सी के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 में स्टडी करने के बाद खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसको लागू किया गया उसके परिणाम अच्छे आने पश्चात फरवरी 2023 में उस समय के उपभोक्ता मामले के खाद्द मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के वाणिज्य भवन, दिल्ली में संयुक्त बैठक थी जिसमें मंत्रालय के सभी उच्च अधिकारी एवं भारतीय खाद्द निगम के सीoएमoडीo(CMD) व उनके उच्च अधिकारी बैठक में शामिल थे सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि देश हित में जो प्रधानमंत्री जी की डिजिटल इण्डिया प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुये इसको सारे देश में लागू किया जाए और साथ में यह भी कहा गया कि जहां –जहां एoजीoएo(AGA) मशीन नहीं था वहाँ इसको खरीदने के लिए टेण्डर लिया जाए और उसके बाद वर्ष 2024-25 में इसको पूर्णतः लागू किया जाएगा परंतु खाद्द मंत्रालय के कुछ अधिकारी और उसके साथ भारतीय खाद्द निगम का फील्ड स्टाफ मिलकर इसको बंद कराने की साजिश रच कर वर्ष 2025 से अलग – अलग समय पर पत्र जारी कर अपनी आपत्ति जताते रहे और देश के कुछ राज्यों में जैसे हरियाणा, तेलंगाना एवं उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश आदि में पूर्णतः बंद कर दिया गया जिससे राइस मिलर्स का उत्पीड़न होता रहा भारतीय खाद्द निगम ने 31 अक्टूबर 2025 को पत्र जारी कर फिर लागू किया और अब 10 प्रतिशत एप्रूव्ड राइस में लागू नहीं कर रहे है जबकि वर्ष 2024-25 में नयी एoजीoएo(AGA) मशीन लेनी थी उसकी प्रक्रिया को रोक कर इसको पूर्णतः बंद करना चाहते है जो की भ्रष्टाचार के लिए बढ़ावा है और माननीय प्रधानमंत्री जी की डिजिटल इण्डिया प्रोग्राम को उपभोक्ता मामले में लागू नहीं होने देना चाहते है ।

पिछले तीन वर्ष से फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) के तहत पोष्टिक आहार वाला चावल बनाकर चावल को राइस मिलर्स को 1 प्रतिशत मिश्रण करने के लिए राज्य सरकारे अलग – अलग तरीके से टेण्डर प्रक्रिया करने के बाद राइस मिलर्स को वहाँ से खरीद कर 1 प्रतिशत चावल से मिश्रण (99 किoग्राo चावल में 1 किoग्राo फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) करवाने के बाद उसको भारतीय खाद्द निगम के द्वारा गरीब उपभोक्ता को वितरित किया जा रहा है । जबकि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) निर्माता की मिलों में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड(BIS) के मुताबिक नहीं है और न उनके मिलें में फूड सेफ़्टी स्टैंडर अथॉरिटी ऑफ इण्डिया(FSSAI) नियम के तहत कोई कार्य नहीं हो रहा है । जिसका असर सीधा – सीधा उपभोक्ता को कुपोषण दे रहा है इस प्रक्रिया से करोड़ों रुपया केंद्र सरकार का नष्ट हो रहा है जिससे सरकार को नुकसान हो रहा है ।

 

हम चाहते है कि केंद्र सरकार के पास दो वर्षों के वितरण हेतु फोर्टिफाइड राइस कर्नेल(FRK) चावल पोष्टिक आहार वाला चावल का स्टाक है इस समय नॉन-फोर्टिफाइड राइस कर्नेल(NON-FRK) चावल लिया जाए फोर्टिफाइड राइस कर्नेल(FRK) निर्माता फोर्टिफाइड राइस कर्नेल(FRK) की सही गुणवत्ता वाला फोर्टिफाइड राइस कर्नेल(FRK) बनाकर नहीं दे पा रहे है जिससे राइस मिले बंद हो गयी है उससे धान खरीद प्रभावित हो रही है और किसान अपनी उपज औने-पौने दाम में बेचने पर मजबूर है । देश की राइस इंडस्ट्री देश के हित का कार्य करती है इसलिए राइस इंडस्ट्री चाहती है कि फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) पूर्णतः बंद कर दिया जाए इससे उपभोक्ता, किसान व सरकार की लूट हो रही है ।

 

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